गरबा में भाग लेने वाले बच्चों को कॉपी, पेन, खिलौने और उपहार देकर किया सम्मानित
अजमेर/घुमन्तु दर्पण(रेखा कुमावत)। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर अजमेर के लोहागल स्थित श्री करणी माताजी मंदिर प्रांगण में गरबा महोत्सव धूमधाम से आयोजित किया गया। मंदिर परिसर माता रानी के जयकारों और गरबा की थाप से गूंज उठा। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे दर्जनों बालक-बालिकाओं ने गरबा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
समाजसेवी राजेंद्र कुमावत ने बताया कि कार्यक्रम में छोटे बच्चों से लेकर बड़े बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ढोलक, नगाड़ों और ‘हे रमती आवे…’ जैसे भजनों की धुन पर बच्चे देर रात तक गरबा करते रहे। उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
बच्चों को उपहार देकर बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के अंत में आयोजक मंडल और मंदिर समिति की ओर से गरबा नृत्य में भाग लेने वाले प्रत्येक बालक-बालिका को कॉपी, पेन, खिलौने और प्रसाद के रूप में उपहार देकर सम्मानित किया गया। उपहार पाकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
गरबा के माध्यम से संस्कृति और परंपरा का संदेश
आयोजकों ने गरबा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि गरबा शब्द संस्कृत के ‘गर्भदीप’ से जुड़ा है। यह जीवन में दिव्य ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र में गरबा मां दुर्गा की आराधना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। गोलाकार घूमकर किया जाने वाला यह नृत्य सृष्टि और जीवनचक्र का भी प्रतीक है।
गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि शक्ति की उपासना और सामाजिक एकता का माध्यम भी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति सम्मान बढ़ता है तथा समाज में भाईचारे की भावना मजबूत होती है।कार्यक्रम में मंदिर के पुजारी, लोहागल के जनप्रतिनिधि, युवा मंडल के सदस्य, सैकड़ों महिलाएं और ग्रामीण मौजूद रहे। अंत में माता रानी की आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।








