गुरला/घुमन्तु दर्पण| राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नेशनल हाईवे और उसकी मेंटेनेंस एजेंसी की घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला गुरला में सामने आया है जो सीधे-सीधे छोटे-छोटे स्कूली बच्चों की जान से जुड़ा हुआ है। नेशनल हाईवे पर Ch. No. 74+250 RHS से लेकर Ch. No. 73+600 RHS तक राजकीय उच्च माध्यमिक, स्कूल के बच्चों के सुरक्षित आने-जाने के लिए बनाई गई सर्विस लेन पिछले कई महीनों से पूरी तरह से मिट्टी, मलबे और गंदगी से अटी पड़ी है।
यह सर्विस लेन नेशनल हाईवे ने इसी उद्देश्य से बनाई थी कि हाईवे किनारे बसे गांव के लोग और विशेषकर स्कूली बच्चे तेज रफ्तार हाईवे पर न आएं। लेकिन आज स्थिति यह है कि इस पर मिट्टी जमा है, बड़े-बड़े पत्थर पड़े हैं, झाड़ियां उग आई हैं।
बच्चों को हाईवे पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इसी सर्विस लेन से होकर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुरला के 200 से अधिक बच्चे रोजाना पैदल और साइकिल से स्कूल जाते हैं। सर्विस लेन बंद होने के कारण इन मासूम बच्चों को मजबूरन नेशनल हाईवे की मुख्य लेन पर चलना पड़ रहा है, जहां गाड़ियों की स्पीड 80 से 100 किमी प्रति घंटा है। पिछले 2 महीने में 3 से 4 बार हादसे होते-होते बचे हैं। अभिभावकों में दहशत का माहौल है।
शिकायत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
ग्रामीणों के अनुसार मेंटेनेंस सुपरवाइजर रामनारायण से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा “मेरे अधिकारी ने मना किया है, मैं यह काम नहीं करवा सकता।” मेंटेनेंस मैनेजर हर्षवर्धन सिंह ने पहले मौके पर आने का आश्वासन दिया, बाद में ग्रामीणों के आरोप के अनुसार फोन पर कहा – “मैं यह काम नहीं करवाऊंगा, आपसे जो होता है कर लो।”*बड़ा हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार?*
नेशनल हाईवे के नियमों के अनुसार मेंटेनेंस एजेंसी को सर्विस लेन, लाइट, डिवाइडर को 24 घंटे साफ रखना होता है। लेकिन गुरला में Ch. No. 74+250 से 73+600 तक सर्विस लेन बंद है और गुरला बस स्टैंड पर 6 महीने से स्ट्रीट लाइट बंद है।








