नई तकनीक से स्लज की नमी और मात्रा होगी कम, उद्योगों को परिवहन व निस्तारण में मिलेगी राहत
भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग में पैडल ड्रायर मशीन की तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से टेक्सटाइल प्रोसेसिंग इकाइयों से निकलने वाले गीले कचरे यानी स्लज की नमी कम करने के साथ उसके सुरक्षित निस्तारण में भी मदद मिलेगी।
महावीर सिंह ने बताया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पहल पर वस्त्र नगरी की प्रोसेस हाउस इकाइयों में पैडल ड्रायर स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 7 प्रोसेस हाउस में मशीन का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि अन्य इकाइयों ने मशीनों के ऑर्डर देकर बोर्ड के पास बैंक गारंटी भी जमा कराई है।
पैडल ड्रायर तकनीक में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की जैविक प्रक्रिया और फिल्टर प्रेस से निकलने वाले गीले स्लज को मशीन के जरिए सुखाया जाता है। मशीन की गर्मी और विशेष पैडल सिस्टम की मदद से स्लज की नमी कम होती है। इससे स्लज का कुल आयतन करीब 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जिससे उसके परिवहन और निस्तारण की लागत में भी कमी आएगी।
सीमेंट उद्योग में उपयोग की संभावना
महावीर सिंह के अनुसार सूखे स्लज का उपयोग सीमेंट उद्योग में वैकल्पिक ईंधन और कच्चे माल के रूप में किए जाने की संभावना है। इससे टेक्सटाइल उद्योग से निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा में पैडल ड्रायर मशीन का स्थानीय स्तर पर निर्माण होने से टेक्सटाइल उद्यमियों को कम लागत में मशीन उपलब्ध होने की उम्मीद है। साथ ही दूसरे राज्यों से मशीन मंगाने पर होने वाला भारी परिवहन खर्च भी बच सकेगा।
भीलवाड़ा में इस तकनीक को अपनाने की पहल को टेक्सटाइल उद्योग के कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








