नोखा/घुमन्तु दर्पण(सुरेश जैन)| पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन व्रत चेतना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रवचन में प्रवक्ता उपासक विनोद कुमार बोरदिया ने कहा कि व्रत, संकल्प और आत्मानुशासन को जीवन में अपनाने वाला व्यक्ति ही वास्तविक अर्थों में श्रमणोपासक बन सकता है। उन्होंने कहा कि सच्चा श्रावक श्रद्धाशील और विवेकशील होता है तथा देव, गुरु और धर्म के प्रति उसकी आस्था एवं समर्पण मजबूत होता है। जीवन को सुखी और संयमित बनाने के लिए चौदह नियमों को धारण करने और अनावश्यक वस्तुओं का त्याग करने की प्रेरणा दी।
बोरदिया ने कहा कि वास्तविक सुख धन से नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और धर्माचरण से प्राप्त होता है। व्रत और संकल्प व्यक्ति को सही दिशा देते हुए आत्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं।इस अवसर पर उपासक रतनलाल मेहता ने भगवान महावीर के आध्यात्मिक भवों पर आधारित गीत प्रस्तुत किए, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सभा अध्यक्ष शुभकरण चोरड़िया ने तप, त्याग और जाप को पर्युषण आराधना का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। सभा मंत्री सुंदरलाल सेठिया ने आभार जताया। इंद्रचंद बैद कवि ने बताया कि नोखा में तपस्या का क्रम जारी है। ज्ञानशाला प्रभारी महावीरजी नाहटा का पंचोला तप तथा प्रिया संखलेचा का तेले का तप चल रहा है। रात्रिकालीन कार्यक्रम में जम्बूकुमार के व्याख्यान का सरस भाषा में विश्लेषण किया जा रहा है।








