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तप, त्याग और जप के साथ पर्युषण महापर्व का शुभारंभ

नोखा/घुमन्तु दर्पण(सुरेश जैन)। जैन धर्म के पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का मंगलवार को नोखा तेरापंथ भवन में तप, त्याग, जप एवं आध्यात्मिक आराधना के साथ शुभारंभ हुआ। इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक धर्माराधना में भाग लिया।प्रवक्ता उपासक विनोद बोरड़िया ने कहा कि धर्म आत्मा की शुद्धि का माध्यम है। व्यक्ति को बुढ़ापे का इंतजार किए बिना बचपन और युवावस्था से ही धर्म एवं संयम के संस्कार अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जप, ध्यान और स्वाध्याय के लिए अलग से समय निकालना जरूरी नहीं है, बल्कि दिन में मिलने वाले कुछ मिनटों का भी सदुपयोग किया जा सकता है। पर्युषण आत्म-जागरण और धर्म के मर्म को समझने का अवसर है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम, उनोदरी और उपवास के माध्यम से पर्युषण की आराधना करने का आह्वान किया। गीतिका के माध्यम से भी धर्म जागरण का संदेश दिया।उपासक रतनलाल मेहता ने कहा कि पर्युषण में ज्ञान, दर्शन, चरित्र और तप की साधना करनी चाहिए। धन-संपत्ति जीवन के साथ नहीं जाती, धर्म ही साथ चलता है। उन्होंने सीमित एवं विवेकपूर्ण भोजन करने तथा छोटे-छोटे त्याग को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। साथ ही भगवान महावीर की वाणी और उनके उपदेशों का उल्लेख किया।

Ghumntu Darpan
Author: Ghumntu Darpan

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