भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। तीर्थंकरों से रिश्ता जोड़ने वाले व्यक्ति का कल्याण होता है। जिस दिन तीर्थंकरों के प्रति निर्मल श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है, उसी दिन सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है। यह विचार राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने सोमवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि जिस व्यक्ति को हम समय नहीं देते, उससे हमारा रिश्ता कमजोर हो जाता है। इसी तरह अरिहंत और तीर्थंकरों के लिए भी प्रतिदिन कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए। भगवान से भक्ति का रिश्ता बनाए रखने वाला व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि सीए, इंजीनियर, डॉक्टर या व्यवसायी बनना जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि जीवन जीने के साधन हैं। मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति होना चाहिए। तीर्थंकरों को संसार के सभी सुख और वैभव प्राप्त होने के बावजूद वे उनमें लीन नहीं हुए और साधना के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया।
चातुर्मास समिति अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस दौरान दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर भी आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पंजीयन करा चुके हैं।प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।








