भीलवाड़ा/घुमंतू दर्पण। नगर निगम की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व महापौर राकेश पाठक के कार्यकाल से जुड़ी भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर अब विभागीय स्तर पर कार्रवाई की कवायद शुरू हो गई है।
अजमेर क्षेत्रीय उपनिदेशक सना सिद्दीकी ने निगम प्रशासन से शिकायतों की तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ संबंधित प्रमाणित दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने पर तत्कालीन आयुक्त हेमाराम के खिलाफ सीसीए नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस घटनाक्रम के बाद मामला महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर विभागीय जांच के दायरे में आता दिखाई दे रहा है।
दो साल से उठ रहे हैं सवाल
भाजपा पार्षद सिसोदिया पिछले करीब दो वर्षों से पूर्व महापौर के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर शिकायतें करते रहे हैं। शिकायतों में कथित अवैध पट्टे, निगम की जमीनों पर कब्जे, नियम विरुद्ध निर्माण और सरकारी आदेशों की अनदेखी जैसे आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतों में चार प्रमुख मामले
कर्बला की जमीन: कथित तौर पर नियमों के विपरीत दुकानों के निर्माण का मामला।
पुर रोड चौराहा: भवन की छत पर कथित अवैध दुकानों के निर्माण की शिकायत।
अजमेर रोड: यूआईटी क्षेत्र में कथित अवैध कॉम्प्लेक्स निर्माण का आरोप।
सांगानेर रोड-कीरखेड़ा: घुमंतू परिवारों को आवंटित भूखंडों की कथित खरीद-फरोख्त और इससे राजस्व को नुकसान पहुंचने की शिकायत।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच और सरकारी रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन विभाग की ओर से दस्तावेज और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगे जाने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है।
भाजपा संगठन के सामने भी चुनौती
शिकायतकर्ता भाजपा पार्षद हैं और नगर निगम बोर्ड पर भी भाजपा का नियंत्रण है। ऐसे में अब सवाल पार्टी संगठन की भूमिका को लेकर भी उठ रहे हैं। क्या मामले की निष्पक्ष जांच होगी या राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
निकाय चुनाव से पहले यह मामला भाजपा की राजनीतिक साख के लिए भी अहम माना जा रहा है।
सीधे मेयर चुनाव की मांग से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
इसी बीच निर्दलीय विधायक की ओर से मेयर और सभापति का चुनाव सीधे जनता से कराने की मांग ने नगर निगम की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। प्रत्यक्ष चुनाव लागू होने की स्थिति में मेयर की कुर्सी पार्षदों के राजनीतिक गणित के बजाय सीधे जनता के वोट से तय होगी|







