घुमन्तु दर्पण। भीलवाड़ा नगर विकास न्यास (यूआईटी) एक बार फिर प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में है। नगरीय विकास विभाग द्वारा 10 जुलाई को जारी स्थानांतरण आदेशों के करीब तीन सप्ताह बाद भी चार अभियंताओं को कार्यमुक्त नहीं किए जाने से सरकारी आदेशों की पालना पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित स्थानांतरण सूची मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की स्वीकृति के बाद जारी की गई थी। इसके बावजूद भीलवाड़ा यूआईटी में आदेशों का पालन नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश के अन्य नगर निकायों में स्थानांतरित अधिकारियों को कार्यमुक्त किया जा चुका है, जबकि भीलवाड़ा यूआईटी में स्थानांतरित अभियंता अब भी अपने पदों पर कार्यरत हैं।सूत्रों के अनुसार, जिन चार अभियंताओं का तबादला हुआ है, वे लंबे समय से भीलवाड़ा में पदस्थापित हैं। आदेश जारी होने के बावजूद उन्हें कार्यमुक्त नहीं किए जाने को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इधर, यूआईटी में सचिव का पद भी पिछले कई महीनों से रिक्त होने के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित बताए जा रहे हैं। भूखंड, पट्टा, निर्माण स्वीकृति और अन्य मामलों में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सचिव के अभाव में कई महत्वपूर्ण फाइलों के लंबित रहने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं।ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर स्थानांतरण आदेशों की पालना में देरी का कारण क्या है और संबंधित अधिकारियों को कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया कब पूरी होगी। इस संबंध में यूआईटी प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।








