फलोदी के नौसर गांव में दर्दनाक हादसा, 600 फीट से अधिक गहराई में फंसे बच्चे को बचाने में जुटी रही एनडीआरएफ और प्रशासन की टीम
फलोदी/घुमन्तु दर्पण। जिले के लोहावट क्षेत्र के नौसर गांव में खुले बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय मासूम भोमाराम को आखिरकार बचाया नहीं जा सका। करीब 39 घंटे तक चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार तड़के 3:25 बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे गांव में शोक छा गया।
खेलते समय खुले बोरवेल में गिरा मासूम
जानकारी के अनुसार, पांचाराम भील के खेत में बोरवेल की मशीन खराब होने के बाद पंप की मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान पास में खेल रहा उनका 9 वर्षीय इकलौता बेटा भोमाराम अचानक खुले बोरवेल में जा गिरा। बोरवेल की गहराई 1050 फीट से अधिक बताई जा रही है, जबकि बच्चा करीब 600 फीट से ज्यादा गहराई में फंस गया था।
एनडीआरएफ सहित बचाव दल ने चलाया अभियान
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अजमेर से एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई। आरएसी के जवानों सहित 50 से अधिक पुलिसकर्मी बचाव अभियान में जुटे रहे। बोरवेल से बच्चों को निकालने के विशेषज्ञ मादाराम को भी देसी तकनीक के साथ मौके पर बुलाया गया।
फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी मौके पर मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। बचाव दल कैमरे की मदद से बच्चे की स्थिति पर नजर रखने का प्रयास कर रहा था।
पत्थर और पानी के कारण आई मुश्किलें
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बोरवेल के भीतर नमी, पानी और बच्चे के ऊपर पत्थर आ जाने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चे को समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका। करीब 39 घंटे की लगातार मशक्कत के बाद शनिवार तड़के उसका शव बाहर निकाला गया।
गांव में पसरा मातम
भोमाराम की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इकलौते बेटे को खोने से परिवार सदमे में है। पुलिस की निगरानी में शव को लोहावट अस्पताल ले जाया गया, जहां आवश्यक कार्रवाई की गई। इस हादसे ने एक बार फिर खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाले खतरों को उजागर कर दिया है।








