पांच साल से सफाई नहीं होने का आरोप, दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण जलदाय विभाग और पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
गुरला/घुमन्तु दर्पण। नेशनल हाईवे-758 स्थित ग्राम पंचायत गुरला में गढ़ के पास बनी पेयजल टंकी के आसपास फैली गंदगी और कीचड़ से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं होने और पाइपलाइन में लीकेज के कारण घरों में गंदा व बदबूदार पानी पहुंच रहा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा।
ग्रामीणों के अनुसार, टंकी की दीवारों पर काई और सीलन जमा है। आसपास घास, झाड़ियां, कांटे, प्लास्टिक कचरा, पॉलिथीन और शराब की बोतलें बिखरी पड़ी हैं। टंकी के नीचे पाइप और वाल्व के पास कीचड़ जमा है। पाइपलाइन में लीकेज और जंग लगे वाल्व भी परेशानी बढ़ा रहे हैं। टंकी के ऊपर लगा लोहे का ढक्कन भी जंग लगा और खुला होने की बात कही जा रही है।
नलों से निकल रहा काला और बदबूदार पानी
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह नल खोलने पर शुरुआत में काला, मटमैला और बदबूदार पानी आता है। पानी के साथ कीचड़, रेत और छोटे-छोटे कचरे के टुकड़े आने की भी शिकायत है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि पाइपलाइन में लीकेज और आसपास जमा गंदगी के कारण दूषित पानी सप्लाई लाइन में पहुंच रहा है। ऐसे में पेयजल की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराना जरूरी है।
पांच साल से सफाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीण किशन सिंह ने आरोप लगाया कि पिछले करीब पांच साल से टंकी की नियमित सफाई नहीं हुई है। टंकी के अंदर सफाई, क्लोरीनेशन, पाइपलाइन की मरम्मत और आसपास की झाड़ियों को हटाने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि शिकायत करने पर कभी ग्राम पंचायत तो कभी जलदाय विभाग की जिम्मेदारी बताकर मामला टाल दिया जाता है।
दूषित पानी से बीमारियों का खतरा
ग्रामीणों को मजबूरी में इसी पानी का उपयोग खाना बनाने, बर्तन धोने और अन्य घरेलू कार्यों में करना पड़ रहा है। दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त, टाइफाइड और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता की जांच कराकर सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने टंकी की अंदरूनी और बाहरी सफाई कराने, आवश्यकतानुसार ब्लीचिंग एवं क्लोरीनेशन करने, आसपास जमा कीचड़ और कचरा हटाने तथा लीकेज वाली पाइपलाइन, जंग लगे वाल्व और ढक्कन की मरम्मत कराने की मांग की है। साथ ही, नियमित सफाई व्यवस्था लागू करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य के बावजूद यदि नलों से गंदा पानी आता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाते हैं।








