गुरला/घुमन्तु दर्पण। पंचायत समिति सुवाणा की ग्राम पंचायत गुरला में कालका माता मंदिर के पीछे स्थित पेयजल टंकी की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पेयजल सप्लाई के लिए उपयोग होने वाली इस टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है और टंकी की जर्जर हालत के कारण पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों के अनुसार टंकी के अंदर काई, कीचड़ और अन्य गंदगी जमा है। उनका कहना है कि करीब पांच साल से टंकी की नियमित सफाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन से टंकी की तत्काल सफाई करवाकर पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
टंकी की ऊपरी सतह भी क्षतिग्रस्त बताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक आरसीसी स्लैब के कुछ हिस्से टूटे हुए हैं और कई जगह सरिया दिखाई दे रहा है। टंकी के एक हिस्से को लोहे की चादर से ढका गया है, जिस पर जंग और गंदगी जमा होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे धूल, पत्तियां और अन्य बाहरी सामग्री टंकी में जाने की आशंका बनी रहती है।टंकी के आसपास और उसकी दीवारों पर झाड़ियां तथा पीपल के पौधे भी उग आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इनकी जड़ों के कारण टंकी की संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका है। साथ ही आसपास साफ-सफाई नहीं होने से जहरीले जीव-जंतुओं के मौजूद रहने का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों ने पेयजल की गुणवत्ता और संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इसी जल का उपयोग ग्रामीण परिवार पीने और घरेलू कार्यों में करते हैं। हालांकि, पानी से होने वाली किसी बीमारी की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग की जांच और पानी की प्रयोगशाला रिपोर्ट आवश्यक होगी।सबसे बड़ा सवाल टंकी की नियमित सफाई और रखरखाव को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले पांच वर्षों में टंकी की सफाई, मरम्मत और रखरखाव पर हुए खर्च का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेने की बात भी कही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि टंकी की तत्काल सफाई और मरम्मत करवाई जाए, आसपास की झाड़ियों को हटाकर आवश्यक दवा का छिड़काव किया जाए तथा टंकी को सुरक्षित तरीके से कवर किया जाए। साथ ही जब तक टंकी पूरी तरह साफ और सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।अब देखना होगा कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन, ग्राम पंचायत और संबंधित जलदाय विभाग टंकी की स्थिति का निरीक्षण कर क्या कार्रवाई करते हैं। मामला ग्रामीणों के स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल से जुड़ा होने के कारण टंकी की सफाई के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता की जांच भी महत्वपूर्ण है।








