बीकानेर/घुमन्तु दर्पण(सुरेश जैन)| नगर निगम चुनाव में मतदान के बाद सभी प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो चुका है। मतदान के बाद सट्टा बाजार के आकलन और आमजन की चर्चाओं में कांग्रेस को बढ़त मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं। वहीं भाजपा भी करीब 30 सीटें जीतने को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। ऐसे में दोनों दलों ने संभावित विजेता पार्षदों को एकजुट करना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने संभावित जीत वाले निर्दलीय प्रत्याशियों से संपर्क साधकर उन्हें अपने पाले में करने की कवायद शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि भाजपा बहुमत से दूर रहने की स्थिति में निर्दलीयों के सहारे एक बार फिर महापौर पद पर कब्जा जमाने की रणनीति बना रही है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी संभावित निर्दलीय विजेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस में तीन धड़ों की चर्चा, भाजपा में भी अंदरखाने रणनीति
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि कांग्रेस बहुमत के आसपास या बहुमत का आंकड़ा पार कर लेती है तो महापौर पद को लेकर पार्टी में तीन अलग-अलग दावेदारों के बीच खींचतान सामने आ सकती है। इनमें कुछ ग्रामीण क्षेत्र के प्रभावशाली नेता भी अपने पसंदीदा चेहरे को महापौर बनाने की कोशिश में बताए जा रहे हैं। वहीं पूर्व मंत्री और शहर कांग्रेस नेतृत्व भी अपने स्तर पर सक्रिय नजर आ रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि शहर और ग्रामीण नेताओं के बीच सहमति नहीं बनी तो कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। दूसरी तरफ भाजपा में भी केंद्रीय मंत्री के समर्थक और विरोधी गुटों के बीच अंदरखाने रणनीति तैयार होने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कुछ विरोधी नेताओं ने ग्रामीण क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता से भी गोपनीय मंत्रणा की है। यदि दोनों प्रमुख दलों में महापौर को लेकर खींचतान बढ़ी तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है और क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।







