बीकानेर/घुमन्तु दर्पण(सुरेश जैन)। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ (हुक्म संघ) के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी म.सा. ने छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में पर्युषण पर्व के तीसरे दिन प्रवचन देते हुए कहा कि गर्भपात महापाप है। उन्होंने श्रद्धालुओं को गर्भपात न करने, न करवाने और इसकी अनुमोदना नहीं करने का संकल्प दिलाया।
आचार्यश्री ने कहा कि पंच महाभूतों से बना शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अजर-अमर और अविनाशी है। व्यक्ति को बाहरी सुंदरता के बजाय मन, भाव और विचारों की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। सांसारिक भोगों की लालसा छोड़कर आत्मकल्याण को जीवन का लक्ष्य बनाना चाहिए।
उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने सद्विचार, साधना और देव-गुरु-धर्म के प्रति समर्पण को जीवन की वास्तविक सुंदरता बताया। मधुर मुनि ने अंतगढ़ सूत्र का विवेचन करते हुए संयम, साधना और समता को जीवन का सार बताया।
पर्युषण पर्व के दौरान श्रद्धालु विभिन्न तपस्याओं और धार्मिक गतिविधियों में उत्साह से भाग ले रहे हैं। सुश्राविका सरला पारख की 31 दिवसीय तपस्या की अनुमोदना भी की गई। सेवा सदन में धार्मिक शिविर, प्रतियोगिताएं और ध्यान साधना का आयोजन भी जारी है।







