भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। एक करोड़ रुपए के चेक बाउंस से जुड़े करीब 12 साल पुराने मामले में एनआई एक्ट कोर्ट संख्या-5 ने फैसला सुनाया है। अदालत ने सुयोजित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड तथा उसके निदेशक अनिल भंवरलाल जैन और वैशाली अनिल जैन को दोषी माना। दोनों निदेशकों को दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है।
2012 में शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई
मामले के परिवादी ललितप्रसाद कालिया ने वर्ष 2012 में अदालत की शरण ली थी। परिवाद के अनुसार बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपियों की ओर से 31 मई 2011 को एक करोड़ रुपए का चेक दिया गया था। भुगतान के लिए चेक 30 नवंबर 2011 को बैंक में लगाया गया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण वह अनादरित होकर वापस आ गया।
साक्ष्यों और दस्तावेजों से हुई पुष्टि
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश हुए। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने कंपनी और उसके दोनों निदेशकों को चेक बाउंस मामले में दोषी माना और सजा सुनाई।
1.40 करोड़ रुपए प्रतिकर देने का आदेश
अदालत ने सजा के साथ दोनों दोषियों पर कुल 1.40 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा परिवादी को 1.40 करोड़ रुपए प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश भी पारित किया गया है।








