भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) में वर्ष 2016-17 से अब तक प्राप्त और खर्च किए गए करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने पर आरटीआई कार्यकर्ता गोटू सिंह राजपूत ने प्रथम अपील दायर की है।राजपूत ने बताया कि 10 जुलाई 2026 को जिला कलेक्टर कार्यालय, भीलवाड़ा के माध्यम से सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत कर DMFT के गठन से वर्ष 2025-26 तक की आय-व्यय और कार्यों से जुड़ी 17 बिंदुओं पर प्रमाणित सूचनाएं मांगी थीं। इनमें प्राप्त धनराशि, स्वीकृत कार्यों का विवरण, बैंक खातों की जानकारी, ऑडिट रिपोर्ट, बैठकों की कार्यवाही, बजट, निरीक्षण रिपोर्ट, परियोजनाओं की स्थिति, प्रशासनिक व्यय, नियुक्तियां, जांच रिपोर्ट, मापन पुस्तिकाएं (एमबी), रनिंग बिल, फाइनल बिल तथा भुगतान संबंधी अभिलेख शामिल थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन संबंधित कार्यालय को स्थानांतरित किए जाने के बाद भी अधिकांश सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। जवाब में कई जानकारियों को अस्पष्ट, अत्यधिक विस्तृत या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर देने से इनकार कर दिया गया, जबकि ये सभी सार्वजनिक अभिलेखों से संबंधित हैं।राजपूत का कहना है कि DMFT में खनन से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और अन्य जनहित कार्यों पर किया जाता है। ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि ट्रस्ट को कितनी राशि प्राप्त हुई, उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया और उसका लाभ किसे मिला।
प्रथम अपील में मांग की गई है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत मांगी गई सभी सूचनाएं प्रमाणित प्रतियों सहित उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, यदि बिना उचित कारण सूचना रोकी गई है तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध अधिनियम की धारा 20 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा कि यह सूचना निजी हित के लिए नहीं, बल्कि जनहित और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मांगी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मामले को राजस्थान सूचना आयोग के समक्ष भी उठाया जाएगा।








