भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। महात्मा गांधी चिकित्सालय में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 19 वर्षीय प्रसूता की मौत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मृतका के परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार जहाजपुर क्षेत्र के रघुनाथपुरा रावतखेड़ा निवासी ज्योति कुमारी कीर ने 8 जुलाई को महात्मा गांधी चिकित्सालय में सीजेरियन ऑपरेशन के जरिए एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था। मृतका के पति फोरूलाल कीर ने बताया कि ऑपरेशन के बाद शुरुआत में ज्योति की तबीयत सामान्य थी, लेकिन 9 जुलाई की रात अचानक उसे तेज सिरदर्द हुआ और वह बेहोश हो गई। हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उसे मेडिकल आईसीयू में भर्ती किया। सुधार नहीं होने पर 10 जुलाई की सुबह उसे उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार उदयपुर में तीन दिन तक उपचार चलने के बावजूद 13 जुलाई को ज्योति की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि उदयपुर के चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि ऑपरेशन के दौरान पेट में संक्रमणयुक्त द्रव (गंदा पानी) रह जाने से संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।परिजनों का यह भी कहना है कि भीलवाड़ा में उपचार के दौरान उन्हें मरीज की वास्तविक स्थिति और गंभीरता से अवगत नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि यदि समय रहते सही जानकारी और उचित उपचार मिलता, तो शायद प्रसूता की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नवजात बच्ची की देखभाल फिलहाल उसकी बुआ कर रही हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार चिकित्सकीय स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।







