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चित्तौड़-भीलवाड़ा सीमा पर कारोई की सड़क बनी दलदल, सांवरिया सेठ जाने वाले श्रद्धालु और ग्रामीण परेशान

गुरला/घुमन्तु दर्पण। चित्तौड़गढ़ जिले से भीलवाड़ा जिले में प्रवेश करते ही कारोई कस्बे का मुख्य मार्ग इन दिनों बदहाल स्थिति में है। सांवरिया सेठ, मंडफिया जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और कई स्थानों पर केवल पीली मिट्टी ही दिखाई देती है। लगातार बारिश के बाद सड़क कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गई है, जिससे राहगीरों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर वर्षों से स्थायी डामरीकरण नहीं हुआ है। समय-समय पर केवल मिट्टी डालकर मरम्मत की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। बारिश के दौरान सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे ट्रक, बस, कार और बाइक चालकों को जोखिम उठाकर सफर करना पड़ता है। दोपहिया वाहन चालक अक्सर फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि एक बार बारिश होने के बाद सड़क कई दिनों तक कीचड़ से भरी रहती है। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और लोगों के जूते-चप्पल तक कीचड़ में खराब हो जाते हैं।

यह मार्ग भीलवाड़ा, कारोई, गुरला, पुर, पहुना, राशमी, गिलुंड और मातृकुंडिया सहित कई क्षेत्रों से आने-जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए सांवरिया सेठ मंदिर पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। खराब सड़क के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। बसों और निजी वाहनों को गड्ढों से बचते हुए धीमी गति से गुजरना पड़ता है, जिससे यात्रा का समय बढ़ जाता है और मरीजों को भी असुविधा होती है।ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा जिलों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से रोडवेज बसें, स्कूल वाहन, एंबुलेंस और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण कई बार एंबुलेंस भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

किसानों ने भी सड़क की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि फसल से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के गड्ढों में पलटने का खतरा बना रहता है। खराब सड़क के कारण चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से कारोई आने वाले व्यापारियों और ग्राहकों की संख्या भी प्रभावित हुई है।ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग का जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण डामरीकरण कराया जाए, ताकि आमजन, श्रद्धालुओं और किसानों को राहत मिल सके।

Ghumntu Darpan
Author: Ghumntu Darpan

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