जयपुर/घुमन्तु दर्पण। राजस्थान में प्रसव और सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौतों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। भीलवाड़ा में हालिया विवाद के बीच अब बांसवाड़ा और सीकर में दो महिलाओं की मौत हो गई है, जबकि कोटा में एक प्रसूता की हालत गंभीर बनी हुई है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांसवाड़ा में स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के दौरे के दिन ही 20 वर्षीय शिल्पा की प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के चलते मौत हो गई। मृत शिशु को जन्म देने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे उदयपुर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जिले में अब तक छह प्रसूताओं और तीन नवजातों की मौत दर्ज होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं।
वहीं सीकर में 25 वर्षीय अंजली की सिजेरियन डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला पहले से गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी और चिकित्सकों ने सभी आवश्यक उपचार किए थे।
इधर कोटा के जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 30 वर्षीय पार्वती की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे आईसीयू में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन के अनुसार महिला गंभीर संक्रमण और बच्चेदानी फटने की स्थिति में अस्पताल पहुंची थी।
उधर भीलवाड़ा में भी हाल ही में प्रसूताओं की मौतों को लेकर जनाक्रोश अभी शांत नहीं हुआ है। लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बाद प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने भी सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग उठाई है।








