भेड़-बकरों की अवैध जब्ती, वसूली और करोड़ों के नुकसान का आरोप समाधान की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। राजस्थान के भेड़-बकरा पालक किसानों ने गुजरात और महाराष्ट्र में परिवहन के दौरान पुलिस, पांजरापोल संस्थाओं तथा कुछ संगठनों द्वारा उत्पीड़न और अवैध वसूली के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति से हस्तक्षेप की मांग की है।
पशुपालकों का कहना है कि भेड़-बकरों को देश की विभिन्न मंडियों तक ट्रकों के माध्यम से ले जाते समय गुजरात और महाराष्ट्र में राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों को रोककर लाखों रुपये की अवैध वसूली की जाती है। रकम नहीं देने पर पशुओं को जब्त कर मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। उनका आरोप है कि न्यायालय से पशु वापस देने के आदेश मिलने के बावजूद उन्हें पशु नहीं सौंपे जाते और कई मामलों में उन्हें मृत घोषित कर बेच दिया जाता है, जिससे पशुपालकों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पशुपालकों ने बताया कि हाल ही में गुजरात के नडियाद और वापी क्षेत्र सहित महाराष्ट्र में भी कई ट्रकों में ले जाए जा रहे बकरों को जब्त किया गया। उनका दावा है कि इन मामलों में करोड़ों रुपये मूल्य के पशु जब्त हुए हैं, जिससे अनेक परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं।
इन्हीं समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर प्रभु , शांति लाल , कैलाश, राजू और असलम ने राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लाल जी रायका को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राजस्थान सरकार तथा संबंधित राज्यों से समन्वय स्थापित कर पशुपालकों के हितों की रक्षा करने, कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने तथा न्यायालय के आदेशों की पालना सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।पशुपालकों का कहना है कि वे पूरे वर्ष मेहनत कर भेड़-बकरों का पालन करते हैं और इन्हें बेचकर परिवार का पालन-पोषण, बच्चों की शिक्षा, विवाह तथा अन्य आवश्यक खर्च पूरे करते हैं। ऐसे मामलों से उनकी जीवनभर की कमाई दांव पर लग जाती है।








