भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण।आदर्श नगर निवासी 7 वर्षीय देवांशी शर्मा अपनी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा के दम पर योग एवं जिम्नास्टिक के क्षेत्र में निरंतर नई पहचान बना रही है। छोटी सी उम्र में ही वह कई जटिल योगासन और जिम्नास्टिक गतिविधियों में दक्षता हासिल कर चुकी है।
देवांशी ने तीन वर्ष की आयु से योग का अभ्यास प्रारंभ किया था। पूर्व प्रधानाचार्य उमा बल्दवा के मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उसकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 65 वर्ष की आयु में भी नियमित योगाभ्यास करने वाली उमा बल्दवा की जीवनशैली से प्रेरित होकर देवांशी ने भी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया।योग के साथ-साथ वह प्रतिदिन जिम्नास्टिक का अभ्यास करती है, जिससे उसकी शारीरिक क्षमता, लचीलापन और आत्मविश्वास में निरंतर वृद्धि हो रही है। पढ़ाई में भी वह समान रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है।
देवांशी के माता-पिता सीमा शर्मा और राजेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि उनकी बेटी खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। परिवार को विश्वास है कि वह भविष्य में भी अपनी मेहनत और समर्पण से नई सफलताएं प्राप्त करेगी।देवांशी की उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि सही मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और निरंतर अभ्यास से कम उम्र में भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।








