आसींद/घुमन्तु दर्पण(परमवीर सिंह कटार)|विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा हरिद्वार में आयोजित केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक में देश के प्रतिष्ठित संत-महात्माओं और धर्माचार्यों ने सनातन धर्म, राष्ट्रहित, गौ-संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत मंथन किया। इस गरिमामय बैठक में भगवान देवनारायण की जन्मस्थली, मालासेरी डूँगरी के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने गौ-संरक्षण को लेकर एक अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावशाली सुझाव प्रस्तुत किया।गौ-वंश के सड़कों पर भटकने पर चिंता और समाधान बैठक को संबोधित करते हुए हेमराज महाराज ने कहा कि आज गौ-वंश जिस तरह सड़कों पर भटकने और दुर्घटनाओं का शिकार होने के लिए मजबूर है, वह अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने एक ठोस समाधान सुझाते हुए कहा, “यदि सरकार भगवान श्री देवनारायण जी के मंदिरों से जुड़ी गोचर भूमि को पूर्णतः संरक्षित और अतिक्रमण मुक्त कर दे, तो एक भी गो-वंश को सड़क पर भटकना नहीं पड़ेगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि गोचर भूमि का उचित प्रबंधन ही गौ-वंश के सम्मानजनक जीवन का आधार है।
सामाजिक समरसता का संदेश
पुजारी हेमराज ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि संतों का कोई वर्ण या जाति नहीं होती, वे सर्वजन हिताय कार्य करते हैं। उन्होंने संदेश दिया कि इसी प्रकार मंदिरों और आश्रमों में आने वाले भक्तों के बीच भी कोई जातिगत भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आश्रम में आने वाले भक्त सिर्फ भक्त होते हैं, उनकी जाति देखना सनातन परंपरा के विरुद्ध है।”बैठक में संतों की गरिमामयी उपस्थिति इस उच्च स्तरीय चिंतन बैठक में धर्म जगत के शीर्ष नेतृत्व ने हिस्सा लिया। इनमें मुख्य रूप से: जगद्गुरु शंकराचार्य
कैलाशानन्द महाराज
बलदेवदास महाराज
भास्करानन्द महाराज
महामंडलेश्वर आचार्य निर्वाणी पीठाधीश्वर विशोकानंद
दीदी माँ ऋतम्भरा
प्रज्ञा भारती दीदी
प्रकाशानंद महाराज
इन संतों के साथ ही देशभर से पधारे अनेक धर्माचार्यों ने देश की वर्तमान परिस्थितियों, मंदिरों के संरक्षण और सनातन समाज को सुदृढ़ बनाने हेतु महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।








