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हल्दी घाटी युद्ध की 450 वीं विजय दिवस पर पराक्रम स्वाभिमान यात्रा दल का भीलवाड़ा स्वागत हुआ

भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण| विश्व विख्यात हल्दी घाटी युद्ध का 18 जून 2026 को 450 वर्ष पूर्ण होंगे, इस युद्ध में ग्वालियर मुरैना के एक ही परिवार की तीन पीढ़ी के परिजनों ने अपना बलिदान देश, धर्म, संस्कृति और मानबिन्दुओं की रक्षार्थ बलिदान किया! इस वर्ष ग्वालियर क्षेत्र में पहली बार “पराक्रम स्वाभिमान यात्रा” निकाली जाएगी!
पराक्रम स्वाभिमान यात्रा का एक जत्था आज हल्दी घाटी जाते हुए भीलवाड़ा रात्रि विश्राम कर रवाना हुआ, भीलवाड़ा आगमन पर करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह कटार, महाराणा कुम्भा ट्रस्ट के अध्यक्ष हेमेन्द्र सिंह डाबला, चतर सिंह मोटरास, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एडवोकेट लादूलाल तेली, विश्व हिंदू परिषद के बद्री लाल सोमानी, विक्रम सिंह खंगारोत, मधुराज सिंह राजावत, आयुर्वेद साधक पंडित श्रीकांत शर्मा, लाेकेश चौहान ने यात्रा दल का स्वागत अभिनंदन किया इस अवसर पर भाजपा नेता नरेंद्र सिंह तोमर ने सभी का अंगवस्त्र दुप्पटा पहनाकर स्वागत किया, मयंक सिंह तोमर ने सभी तिलक लगाकर माल्यार्पण किया! पराक्रम स्वाभिमान यात्रा कार्यक्रम के संयोजक रामचंद्र सिंह सांगोली और पंडित श्याम सुंदर शुक्ल, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह तोमर (भिंडोसा), श्याम सिंह पलोखरा, दिनेश सिंह नगरा, सुधीर सिंह, अन्नू सिंह पोरसा, अबोध सिंह धरा, सोनू सिंह राठौड़, नवल सिंह, जितेंद्र सिंह कुथीयाना, सुनील सिंह ऐसाह, रवि सिंह चौहान मानपुरा, उमाशंकर सिंह ऐसाह इस दल में शामिल थे, सभी ग्वालियर से भीलवाड़ा होते हुए हल्दी घाटी जाएंगे, श्री नाथ जी के दर्शन कर, रक्त तलाई की पूजा करके राजा रामशाह तोमर की छतरी पर नमन करके हल्दी घाटी की पावन माटी को “कलश” में लेकर ग्वालियर जाएंगे! प्रातः स्मरणीय हिंदुआ सूरज
महाराणा प्रताप सिंह 18 जून 1576 को हल्दी घाटी के रण क्षेत्र में युद्ध करने आए तब राजस्थान के कई राजाओं ने मेवाड़ के इस ऐतिहासिक युद्ध में साथ देने से मना कर दिया था, जयपुर राजघराना सहित कई राजघराने उस समय अय्याश, आक्रमणकारी,मुगल अकबर के साथ थे, तब एक हजार किलोमीटर दूर स्थित ग्वालियर मध्यप्रदेश के इस राजा रामशाह तोमर ने पूरा साथ दिया, उनकी तीन पीढ़ी के परिजन इस युद्ध में बलिदान हो गए, राजा रामशाह तोमर, पुत्र शालीवाहन सिंह तोमर, प्रताप सिंह तोमर, भवानी सिंह तोमर, पौत्र बलभद्र सिंह तोमर ने हल्दी घाटी की रणभूमि बलिदान किया! ग्वालियर के राजा रामशाह तोमर के संग उनके विश्वत सहयोगी दाऊ सिंह सिकरवार, बाबू सिंह भदोरिया के नेतृत्व में चंबल घाटी के वीर रणबांकुरो ने बलिदान करके अकबर को “हल्दी घाटी” में धराशाही किया! इस अभूतपूर्व पराजय से अकबर ने अपनी सेना के सेनापति राजा मानसिंह का दरबार में प्रवेश ही बंद कर दिया!

Ghumntu Darpan
Author: Ghumntu Darpan

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