गुरला/घुमन्तु दर्पण(बद्री लाल माली)। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की महत्वाकांक्षी कस्तूरी ब्रांड कपास परियोजना राजस्थान में किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। टैक्सपोरोसिल द्वारा भारतीय कपास उद्योग परिसंघ (CITI) के सहयोग से संचालित इस परियोजना में भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा जिले के करीब 1200 किसानों को जोड़ा गया है। परियोजना का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तायुक्त कपास उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना और भारतीय कपास को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाना है।
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता खेत से वस्त्र तक पूर्ण ट्रेसेबिलिटी है। कस्तूरी ब्रांड के कपड़ों पर लगे QR कोड को स्कैन कर उपभोक्ता यह जान सकता है कि कपास किस किसान के खेत में पैदा हुई और किस वस्त्र मिल में उससे कपड़ा तैयार किया गया। इससे उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बन गई है।कस्तूरी परियोजना के तहत कपास की खरीद केवल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरने वाली फसल की ही की जाती है। किसानों की बोआई से लेकर तुड़ाई तक की पूरी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाती है, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होती हैं।
हाल ही में 14 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में राजस्थान के दो किसानों को ‘कस्तूरी मित्र’ के रूप में सम्मानित किया गया। चित्तौड़गढ़ जिले के ग्राम पहुना निवासी रामलाल को विजेता (Winner) तथा भीलवाड़ा जिले के ग्राम ढोसर निवासी नारायण लाल को रनर-अप पुरस्कार प्रदान किया गया। किसान मित्र श्रेणी में पूरे देश से केवल इन्हीं दो किसानों का चयन होना राजस्थान और विशेष रूप से भीलवाड़ा-चित्तौड़ क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।भीलवाड़ा जिले की कपास विकास परियोजना ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रति हेक्टेयर औसत कपास उत्पादन के मामले में भीलवाड़ा परियोजना देश में पहले स्थान पर है। इतना ही नहीं, यहां की औसत पैदावार विश्व औसत से भी अधिक दर्ज की गई है, जो जिले के किसानों की मेहनत और आधुनिक तकनीकों के सफल उपयोग का प्रमाण है।
हाल ही में विजयनगर में आयोजित किसान मेले में भारतीय कपास निगम की पूर्व सीएमडी पी. अल्ली रानी ने भी राजस्थान की कपास की गुणवत्ता की सराहना करते हुए उत्कृष्ट किसानों को 15 कपास चुनने की मशीनें पुरस्कार स्वरूप प्रदान कीं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों में भी भीलवाड़ा के 10 किसान राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं, जिनमें तीन महिला किसान भी शामिल हैं।पूर्व परियोजना समन्वयक पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि कस्तूरी ब्रांड कपास परियोजना से किसानों को बेहतर तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बेहतर मूल्य मिल रहा है। वहीं उपभोक्ताओं को शत-प्रतिशत ट्रेस करने योग्य भारतीय कपास से निर्मित वस्त्र उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे ‘मेड इन इंडिया’ कपड़ों की विश्व बाजार में पहचान और मजबूत हो रही है।






