गुरला/घुमन्तु दर्पण(बद्री लाल माली )। नेशनल हाईवे-758 के किनारे स्थित ऐतिहासिक गुरला गढ़ इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक सूर्यास्त के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। गुरला के ठाकुर चंद्रवीर सिंह पुरावत द्वारा कैमरे में कैद किए गए रणजीत सागर तालाब के सूर्यास्त और गढ़ की छतों पर सजे फूलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यहां पर्यटकों और फोटोग्राफी प्रेमियों की आवाजाही बढ़ गई है। तस्वीरों में एक ओर शांत रणजीत सागर तालाब का विस्तृत जलाशय दिखाई देता है तो दूसरी ओर रंग-बिरंगे फूलों और बोनसाई से सजी गढ़ की छतें। अरावली की पहाड़ियों के पीछे ढलता सूरज पूरे आकाश को गुलाबी और सुनहरे रंगों से रंग देता है, जिससे पूरा वातावरण बेहद मनमोहक नजर आता है।
फूलों और बोनसाई ने बढ़ाई गढ़ की खूबसूरती
गढ़ की छतों पर लगे बोगनविलिया, गुड़हल, चंपा और विभिन्न प्रकार के बोनसाई सूर्यास्त की रोशनी में अलग ही छटा बिखेरते हैं। मकड़ी के जालों पर पड़ती सूर्य की किरणें और फूलों के क्लोजअप भी फोटोग्राफी के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यही वजह है कि फोटोग्राफर्स के लिए गुरला गढ़ किसी प्राकृतिक स्टूडियो से कम नहीं माना जा रहा।
पर्यटन की अपार संभावनाएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद भीलवाड़ा शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोग यहां सूर्यास्त देखने और फोटोग्राफी के लिए पहुंच रहे हैं। शाम के समय तालाब की ठंडी हवा और शांत वातावरण पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यहां मूलभूत पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएं तो गुरला गढ़ भीलवाड़ा का प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है।
क्या बोले ठाकुर चंद्रवीर सिंह पुरावत
ठाकुर चंद्रवीर सिंह पुरावत ने कहा, “गुरला गढ़ प्रकृति का दिया हुआ अनमोल तोहफा है। मेरी कोशिश है कि रणजीत सागर का यह अद्भुत सूर्यास्त दुनिया तक पहुंचे। यदि प्रशासन सहयोग करे तो गुरला गढ़ भीलवाड़ा का ‘मिनी उदयपुर’ बन सकता है| उन्होंने बताया कि सूर्यास्त के समय शाम 6 से 7 बजे के बीच यहां का दृश्य सबसे अधिक आकर्षक होता है और फोटोग्राफी के लिए यह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।








