चित्तौड़गढ़/घुमन्तु दर्पण। करोड़ों रुपए के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े चर्चित मामले में पुलिस जांच के बाद बड़ा मोड़ सामने आया है। सदर थाना पुलिस ने सर्वोदय मानव सेवा संस्थान एवं उससे जुड़े 11 नामजद व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण में विस्तृत अनुसंधान के बाद न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) पेश कर दी है। पुलिस जांच में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर मामले को पूरी तरह निराधार पाया गया है।
जानकारी के अनुसार वैशाली नगर, सेगवा हाउसिंग बोर्ड निवासी तेजसिंह चौहान ने 18 जुलाई 2025 को सदर थाने में परिवाद प्रस्तुत कर सर्वोदय मानव सेवा संस्थान के पदाधिकारियों और अन्य लोगों पर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपए के गबन और वित्तीय घोटाले का आरोप लगाया था। शिकायत में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों के अलावा बैंक अधिकारियों और अन्य संस्थानों को भी आरोपी बनाया गया था।
मामले में कोटा निवासी गुलशन भागवानी, निम्बाहेड़ा निवासी अजय तोषावड़ा, नीमच निवासी उमा जाट, मधु चिमनानी, अमित शर्मा, पुनीत चिमनानी, गिरिराज चेचाणी सहित कुल 11 व्यक्तियों एवं संस्थानों को नामजद किया गया था। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय, कोड ऑर्गनाइजेशन, आईसीआईसीआई बैंक तथा आरबीएल बैंक के तत्कालीन प्रबंधकों को भी आरोपियों में शामिल किया गया था।
मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सदर थाना पुलिस ने संस्था के वित्तीय दस्तावेज, बैंक खातों के रिकॉर्ड, लेन-देन संबंधी जानकारी और अन्य दस्तावेजों की गहन तकनीकी एवं कानूनी जांच की। लंबे समय तक चले अनुसंधान के दौरान संबंधित पक्षों से पूछताछ की गई और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया गया।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। अनुसंधान में यह भी सामने आया कि कथित गबन अथवा आपराधिक कृत्य की घटना घटित होना प्रमाणित नहीं हुआ। इसके आधार पर पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, चित्तौड़गढ़ में अदम वकुआ (घटना का घटित नहीं होना) की अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रकरण को बंद करने की अनुशंसा की है।
पुलिस की इस रिपोर्ट से मामले में नामजद किए गए सभी व्यक्तियों, संस्था पदाधिकारियों और बैंक अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और प्रकरण फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन है।







