भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। गौचर बचाओ फाउंडेशन द्वारा राजस्थान की अमूल्य चरागाह (गौचर) भूमि के संरक्षण एवं जनजागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरला क्षेत्र के बासंडा, समोडी और केवाड़ा गांवों में चरागाह भूमि संरक्षण सूचना बोर्ड स्थापित किए गए।
इस अवसर पर फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक गोटू सिंह मंगलपुरा, कालू रेबारी, लादू लोहार, एम.एल. कुमावत सहित कई ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
चरागाह भूमि संरक्षण पर जागरूकता अभियान
फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि चरागाह भूमि ग्रामीण जीवन की एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति है, जो गौवंश एवं अन्य पशुओं के लिए चारे का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई स्थानों पर चरागाह भूमि पर अतिक्रमण एवं अवैध उपयोग की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे पशुधन एवं पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
11 हजार बोर्ड लगाने का लक्ष्य
फाउंडेशन ने जानकारी दी कि भीलवाड़ा जिले में लगभग 11 हजार सूचना बोर्ड लगाए जाने की योजना है, जिससे चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने में मदद मिलेगी और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ेगी।
खसरा नंबर और QR कोड सहित विवरण
सूचना बोर्ड पर संबंधित चरागाह भूमि का खसरा नंबर, क्षेत्रफल एवं अन्य आवश्यक विवरण अंकित किए गए हैं, ताकि आमजन को भूमि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। साथ ही बोर्ड पर QR कोड एवं जनसहयोग की अपील भी शामिल की गई है।
ग्रामीणों से सहयोग की अपील
गौचर बचाओ फाउंडेशन ने आमजन से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र की चरागाह भूमि की सुरक्षा एवं संरक्षण में सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या अवैध गतिविधि की जानकारी संबंधित प्रशासन एवं फाउंडेशन को दें।
फाउंडेशन का उद्देश्य राजस्थान के प्रत्येक गांव में चरागाह भूमि की पहचान कर सूचना बोर्ड स्थापित करना है, जिससे हजारों बीघा गौचर भूमि को सुरक्षित रखा जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।








