डेगाना/घुमन्तु दर्पण(सुशील लोरा)।सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। प्रार्थी सुरेश सिंह ने ग्राम जावा सिसोदिया के म्यूटेशन संख्या 440 से संबंधित दस्तावेजों की सूचना मांगी थी, लेकिन सहायक सूचना अधिकारी, डेगाना द्वारा कार्यालय में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की टिप्पणी करते हुए सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसके बाद प्रार्थी ने एडवोकेट बीरम सिंह रावत के माध्यम से राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान एडवोकेट रावत ने पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि सूचना उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में विभाग को इसकी विधिवत पुष्टि करनी चाहिए।
मामले की सुनवाई के बाद मुख्य सूचना आयुक्त ने तहसीलदार डेगाना को निर्देश दिए कि यदि नामांतरण से संबंधित दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तो इस संबंध में 100 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र प्रस्तुत किया जाए। आयोग ने आदेश दिया कि शपथपत्र को विधिवत अधिप्रमाणित कर निर्णय की तिथि से 30 दिनों के भीतर डाक के माध्यम से प्रार्थी को उपलब्ध कराया जाए।
राज्य सूचना आयोग के इस आदेश से प्रार्थी को राहत मिली है तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है।








