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पंचायती राज कर्मचारियों ने दी जलसमाधि की चेतावनी

बीकानेर/घुमन्तु दर्पण(सुरेश जैन)|राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा बरसों से अपनाए जा रहे कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और मौलिक अधिकारों से जुड़ी मांगों को ठंडे बस्ते में डाले जाने से खिन्न करीब 16,000 मंत्रालयिक कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है।सोमवार को प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिला स्तर पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर जिला कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में मांग पूरी नहीं होने पर सामूहिक जलसमाधि लेने की चेतावनी दी है।प्रदेश संरक्षक अजीत सिंह का आरोप है कि विगत दो वर्षों से कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 की जांच के नाम पर उनके नैसर्गिक न्याय की मांगों को लंबित रखा जा रहा है।जो न्यास संगत नहीं है। संगठन ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एक ही भर्ती को अलग-अलग स्तर पर जांच करवाना,मुख्य जांच अधिकारी को मंत्रालयिक कर्मचारियों के मामलों से पृथक रखने की सांगठनिक मांग को दरकिनार करना और गलत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करवाना साफ तौर पर प्रशासनिक और सांगठनिक मिलीभगत का साक्ष्य है।शासन किसी संवर्ग विशेष के प्रभाव में आकर मंत्रालयिक कर्मचारियों के हितों को लगातार कुचल रहा है,जिसके साक्ष्य संगठन समय-समय पर विभाग के समक्ष प्रस्तुत करता रहा है।

डेढ़ साल से मांग कर रहे कर्मचारी

पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी जिलाध्यक्ष राजूराम गोदारा ने बताया कि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की विभिन्न मांगें लंबे समय से लंबित हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि इन मांगों के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।प्रदेशभर के लगभग 16 हजार मंत्रालयिक कर्मचारी पिछले ढाई वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों ने ज्ञापन में उत्तराखंड पैटर्न लागू करने,कैडर रिव्यू,स्वतंत्र कार्य विभाजन,नोशनल लाभ और अंतरजिला स्थानांतरण सहित कई प्रमुख मांगें रखी हैं।संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि आंदोलन के तहत जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रचार-प्रसार अभियान,ज्ञापन,संवाद कार्यक्रम,पेन डाउन आंदोलन ,सद्बुद्धि यज्ञ और जयपुर कूच जैसे चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे

6 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 10 जून से 16 जून तक राज्यभर में एक साथ संपूर्ण आधे दिन के लिए कार्य बहिष्कार रखते हुए ‘पेन डाउन’ हड़ताल की जाएगी,जिसमें पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों के कर्मचारी हिस्सा लेंगे।तत्पश्चात 17 से 19 जून तक ब्लॉक,जिला एवं प्रदेश स्तर पर सद्बुद्धि यज्ञ तथा अन्य विरोध गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।24 जून को समस्त प्रदेश पदाधिकारी,जिलाध्यक्ष व महामंत्री जयपुर के लिए कूच करेंगे,वहीं 25 जून को प्रात: 10 बजे से समस्त ब्लॉक अध्यक्ष और महामंत्री अपनी कमेटियों के साथ जयपुर कूच करेंगे।इस दौरान जयपुर सहित समस्त संभाग व जिला मुख्यालयों पर पहुंचने वाले मंत्रियों तथा अधिकतम विधायकों का घेराव स्थानीय उपलब्धता के आधार पर जिलाध्यक्षों,महामंत्रियों और प्रदेश कार्य समिति सदस्यों द्वारा किया जाएगा।इसके बाद 01 जुलाई से ‘दीबी जी राम जी’ का संपूर्ण बहिष्कार अनिश्चितकाल के लिए प्रारंभ किया जाएगा।आंदोलन के चरम पर 06 जुलाई को पंचायती राज संस्थाओं के समस्त मंत्रालयिक कर्मचारी जयपुर में मुख्यमंत्री का महाघेराव करेंगे।यदि फिर भी समुचित कार्यवाही नहीं हुई,तो अंतिम कदम के रूप में 07 जुलाई को जल महल तक पदयात्रा की जाएगी,जहां प्रेस ब्रीफिंग कर संवर्ग विशेष द्वारा सांगठनिक भ्रष्टाचार से अर्जित अकूत राशि के दम पर मंत्रालयिक संवर्ग के खिलाफ माहौल बनाने और दमनात्मक कार्यवाहियों से जुड़े समस्त दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे।इसके बाद मुख्य प्रदेश पदाधिकारियों के नेतृत्व में सभी जिलाध्यक्ष और महामंत्री सामूहिक जल समाधि लेंगे।

Ghumntu Darpan
Author: Ghumntu Darpan

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