भीलवाड़ा/घुमन्तु दर्पण। महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर सोमवार को नर्सिंग कर्मियों ने अपनी सेवा बहाली की मांग को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. वर्षा सिंह द्वारा जारी उस आदेश के खिलाफ किया जा रहा है, जिसमें प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत 48 नर्सिंग कार्मिकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
धरने पर बैठे नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से अस्पताल के इमरजेंसी, आईसीयू और पीआईसीयू जैसे अत्यंत संवेदनशील वार्डों में लगातार सेवाएं दे रहे थे। इसके बावजूद अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें कार्य से हटा दिया गया, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
नर्सिंग कर्मियों के प्रतिनिधि लखन राव ने बताया कि कई कार्मिक पिछले 6 महीने से लेकर डेढ़ साल तक अस्पताल में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारी मात्र 6 से 7 हजार रुपये के कम वेतन में दिन-रात मेहनत कर मरीजों की सेवा कर रहे थे। कई कर्मचारी शादीशुदा हैं और परिवार का पालन-पोषण इसी नौकरी पर निर्भर है। ऐसे में अचानक सेवाएं समाप्त करना अन्यायपूर्ण और तानाशाहीपूर्ण फैसला है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे नियमित रूप से सुबह, शाम और नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करते थे तथा रजिस्टर में हस्ताक्षर भी करते थे, लेकिन अब प्रशासन द्वारा उन रिकॉर्ड्स को भी गायब कर दिया गया है। उनका कहना है कि अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के कई पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद अनुभवी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है।
धरने पर बैठे नर्सिंग कर्मियों ने प्रशासन से मांग की है कि हटाए गए सभी 48 कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से वापस काम पर लिया जाए और उनकी सेवाएं बहाल की जाएं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज करते हुए मेडिकल कॉलेज के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।








