विमोचित पुस्तकों में एडवोकेट सुशील कुमार सैनी की लिखित एनडीपीएस लॉ, एडवोकेट रवेल भारतीय की लिखित द लॉ ऑफ चेक डिसऑनर तथा विजय प्रताप सिंह राठौड़ की लिखित क्राइम अगेंस्ट वूमेन शामिल हैं। तीनों पुस्तकों के लेखन में विनायक चितलंगी ने भी समान रूप से लेखकीय दायित्व निभाया।
पुस्तकों का विमोचन बीकानेर के कथावाचक श्रद्धेय पंडित भाई श्री, बीकानेर बार काउंसिल ऑफ लॉ के सदस्य कुलदीप शर्मा तथा नोखा के वरिष्ठ अधिवक्ता पन्नालाल संचेती ने संयुक्त रूप से किया।इस अवसर पर लेखकों ने अपनी-अपनी पुस्तकों की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये पुस्तकें भविष्य में अधिवक्ताओं के लिए उपयोगी साबित होंगी। इनमें संबंधित कानूनी विषयों की विस्तृत जानकारी के माध्यम से विधिक कार्यों में मार्गदर्शन मिलेगा।
मुख्य अतिथि श्रद्धेय पंडित भाई श्री ने कहा कि पुस्तक लेखन अत्यंत श्रमसाध्य कार्य है। यह किसी तपस्या और साधना से कम नहीं है। उन्होंने लेखकों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे ज्ञान के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कुलदीप शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता पन्नालाल संचेती ने भी लेखकों के कार्य की प्रशंसा की।
समारोह में नोखा बार के अधिवक्ताओं के अलावा समाजसेवी, उद्यमी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें मूलचंद बोथरा, विजय राज सेठिया, भंवरलाल बाहेती, मनोज राठी, ओमप्रकाश राठी, प्रकाश डागा, गोपाल राठी और पूनमचंद सहित अनेक प्रबुद्धजन शामिल हुए।वहीं अधिवक्ताओं में गिरिराज जोशी, पप्पू राम, भगवान राम, बजरंग, दीपक शर्मा, महेंद्र सिंह, आसाराम सियोल, प्रवीण सोनी, मुक्तबा, गुलशन शर्मा, भंवरलाल जनागल, प्रशांत और राकेश बिश्नोई सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. जयकरण चारण ने किया। समारोह में उपस्थित लोगों ने इस साहित्यिक एवं विधिक पहल की सराहना की।






